Wednesday, 13 May 2020

दहेज का खात्मा

दहेज दुश्मन हैं
दहेज के कारण आज लाखों बेटियों को जान गंवानी पड रही हैं  परंतु समाज और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं इससे सिद्ध हैं की यह एक सामाजिक कुप्रथा हैं जिसे केवल आध्यात्मिक ज्ञान से ही खत्म किया जा सकता हैं और दहेज लेना व देना बंद किया जा सकता हैं। 

दहेज एक माया ही हैं और माया कभी भी इंसान को सुखी नहीं होने देती हैं आगे से आगे कुछ ना कुछ करवाती रहती हैं. . . . . .

विवाह कैसे करना चाहिए?
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विवाह मे व्यर्थ का खर्च त्यागना पडेगा। जैसे बेटी के विवाह मे बडी बारात का आना,दहेज देना व लेना यह व्यर्थ की परंपरा अर्थात कुप्रथा हैं। जिस कारण से बेटी परिवार पर भार मानी जाने लगी हैं और उसको गर्भ में ही मारने का सिलसिला शुरू है जो कि माता-पिता के लिए महापाप का कारण बन जाता हैं। बेटी देवी का स्वरूप होती हैं। हमारी कुपरंपराओं ने बेटी को समाज का दुश्मन बना दिया हैं। 
देवीपुराण मे भी प्रमाण
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श्रीदेवीपुराण के तीसरे स्कंद में प्रमाण हैं कि इस ब्रह्मांड के प्रारंभ में तीनों देवताओं(ब्रह्मा, विष्णु तथा शिवजी ) का जब इनकी माता श्रीदुर्गा ने विवाह किया, उस समय न कोई बाराती था,ना कोई भाती था। न कोई भोजन भंडारा किया था। न डी.जे. बजा था,न कोई नृत्य किया था।

क्या आपने सोचा है कभी!!!!
"दहेज"
यह कुप्रथा किसने चलाई ??? और क्यो ???

दहेज को केवल आध्यात्मिक ज्ञान से ही खत्म किया जा सकता हैं। आज भी संत रामपालजी महाराज जी लाखों बेटियों का विवाह बिना दान,दहेज के बिल्कुल फ्री में करवा रहे है। और सभी लडकियां बिल्कुल सुखी रह रही है। अब समाज पर लडकी बोझ नहीं होगी।

संत रामपाल जी महाराज को अपनाएंगे।
विश्व  को दहेज मुक्त बनाएंगे।।
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